भोपाल / काउंसलिंग कभी भी शुरू हो, फीस निर्धारण की समस्या नहीं आएगी

उच्च शैक्षणिक संस्थानों में अकादमिक गतिविधियों के अलावा परीक्षाएं स्थगित हैं। जरूरी कार्यों को अधिकारी और शिक्षक अपनों घरों से निपटा रहे हैं। लॉकडाउन होने के कारण स्थगित हुई परीक्षा से सबसे अधिक असर आने वाले सत्र की एडमिशन प्रक्रिया पर पड़ेगा। प्राइवेट संस्थानों में एडमिशन प्रक्रिया शुरू होने से पहले उनके यहां संचालित प्रोफेशनल कोर्स की फीस एडमिशन एंड फी रेगुलेटरी कमेटी (एएफआरसी) को तय करना होता है। फीस समय पर तय नहीं होगी तो एडमिशन प्रक्रिया शुरू करने में दिक्कत आ सकती है। 


इस मामले में एएफआरसी के अधिकारियों का कहना है कि पूरी कोशिश करेंगे कि फीस निर्धारण की प्रक्रिया से एडमिशन काउंसलिंग प्रभावित न हो सके। वर्तमान स्थिति को देखकर एएफआरसी कुछ बड़े कदम उठा सकती है। ऐसे में काउंसलिंग कभी भी शुरू इसका असर एडमिशन प्रक्रिया पर नहीं पड़ेगा। इसमें छात्रों के हितों को पूरी तरह से सुरक्षित किया जा सकेगा। 


अधिकारियों ने बताया कि लॉक डाउन होने के कारण आपातकालीन स्थिति तो दो तरह से फीस तय कर सकती है। इसमें ऐसे इंस्टीट्यूट जिनकी फीस कमेटी द्वारा पूर्व में की जा चुकी है तो उनके लिए पिछली फीस को ही रिवाइज्ड किया जा सकता है। इसका बाद में कमेटी से एप्रूवल लिया जा सकता है। इसके अलावा नए इंस्टीट्यूट की फीस के निर्धारण में सचिवालय स्तर ही फीस तय की जाएगी  इसका मकसद यही होगा कि कोई भी इंस्टीट्यूट छात्रों पर मनमर्जी की फीस नहीं थोप सके।


नीट-पीजी काउंसलिंग स्थगित होने से नहीं पड़ा असर
मेडिकल काउंसलिंग कमिटी (एमसीसी) ने नीट पीजी ऑल इंडिया काउंसलिंग के शेड्यूल को स्थगित कर दिया है। एडमिशन के लिए आवंटित कॉलेजों में रिपोर्टिंग करने की प्रक्रिया स्थगित की गई है। इसके चलते पीजी काउंसलिंग के माध्यम से एडमिशन से पहले फीस तय की जा सकेगी। इसके लिए एएफआरसी सचिवालय द्वारा वर्तमान में 2020-21, 2021 अौर 2022-23 के लिए फीस तय करने की प्रक्रिया जारी है। इसके अंतर्गत चिकित्सा व दंत चिकित्सा शिक्षण संस्थाओं में संचालित पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स फीस तय करने के लिए 7 मार्च तक आवेदन बुलाए जा चुके हैं। अन्य कोर्स प्रोफेशन कोर्स की फीस तय करने के लिए 13 अप्रैल तक आवेदन मांगे हैं। इसमें बढ़ोतरी की जाती है।


आपात स्थिति में एडमिशन से पहले ऑनलाइन जारी हो जाएगी फीस
प्रो. आलोक चौबे, सचिव एएफआरसी के मुताबिक, अधिकतर कोर्स की फीस निर्धारण की प्रक्रिया 15 अप्रैल के बाद ही शुरू की जाती है। इसका कारण है कि फाइनेंशियल ईयर 31 मार्च तक होता है। इसके बाद ही इंस्टीट्यूट मांगी गई जानकारी उपलब्ध करा पाते हैं। निर्धारण जून तक होता है। फिर भी हम इसके लिए भी तैयार है कि आपात स्थिति बनती है तो छात्रों की फीस एडमिशन लेने पहले तय कर ऑनलाइन जारी कर दी जाएगी। जिससे एडमिशन काउंसलिंग प्रभावित नहीं हो सके।